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Facebook ने किया अपने Oversight Board के शुरुआती 20 सदस्यों का ऐलान; स्वतंत्र रूप से कंटेंट गवर्नेंस के लिए ज़िम्मेदार

Facebook ने किया अपने Oversight Board के शुरुआती 20 सदस्यों का ऐलान; स्वतंत्र रूप से कंटेंट गवर्नेंस के लिए ज़िम्मेदार

काफी समय से पूरी दुनिया में फैली तमाम सुर्ख़ियों में से एक आज सच साबित हुई और इसकी वजह बनी है दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनी, Facebook.

दरसल आज Facebook ने काफी समय से प्रस्तावित महत्वपूर्ण 40 सदस्यीय ‘Oversight Board’ के पहले 20 सदस्यों की घोषणा कर दी है। जी हाँ! Oversight Board असल में Facebook द्वारा बनायीं गयी एक स्वतंत्र इकाई है जो मुख्य रूप से कंटेंट गवर्नेंस और एन्फोर्समेंट की जिम्मेदारी संभालती नजर आएगी।

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह बोर्ड वाकई असरदार या कहें तो प्रासंगिक साबित होगा? खासकर मौजूदा हालातों को देखतें हुए जब Facebook के अधिकतर प्लेटफार्म, ट्रोलिंग और घृणा फैलाने वाले मंच के रूप में ज्यादा नाम कमा रहें हैं।

आपको याद ही होगा कंपनी की छवि को बुरी तरह से प्रभावित करने वाले Cambridge Analytica कांड के बाद Facebook के फाउंडर Mark Zuckerberg ने 2018 में इस Oversight Board का ऐलान किया था। दरसल नवंबर 2018 में Mark Zuckerberg ने एक बयान में कहा था,

“Facebook को सिर्फ अपने दम पर अभिव्यक्ति की आज़ादी और सुरक्षा संबंधी इतने महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लेने चाहिए।”

और तब Mark Zuckerberg के इसी बयान को Oversight Board की ओर एक बड़ा इशारा माना गया था।

बता दें Oversight Board अब Facebook के भीतर ही एक स्वतंत्र बोर्ड के रूप में काम करेगा, जो कुछ मुश्किल और महत्वपूर्ण कंटेंट को लेकर स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में सक्षम होगा। दिलचस्प यह है कि इस सोशल मीडिया दिग्गज कंपनी ने इस बोर्ड के लिए Facebook के आलोचकों और समर्थकों दोनों से इनपुट माँगें थे, जिसके लिए कंपनी ने 88 विभिन्न देशों में 650 से अधिक लोगों के साथ वर्कशॉप और राउंडटेबल्स की मेजबानी भी की।

और अब जाकर आज इस बोर्ड के 20 सदस्यों की घोषणा की गयी है। Facebook के अनुसार इन सदस्यों के पास विचारों और अनुभवों की विस्तृत क्षमता है और यह सभी 27 से अधिक देशों में रह चुके हैं व कम से कम 29 भाषाएँ बोलते हैं और सभी Oversight Board के मिशन को लेकर प्रतिबद्ध हैं।

वहीँ इस विषय पर इस बोर्ड के अधिकारों पर बात करते हुए कंपनी के ग्लोबल अफेयर्स एंड कम्युनिकेशंस के उपाध्यक्ष, Nick Clegg ने कहा,

“हम बोर्ड से उम्मीद करते हैं कि वह कुछ ऐसे निर्णय भी ले सकेगा, जिसके लिए आमतौर पर Facebook राजी नहीं होता। और असल में यही मकसद भी है कि बोर्ड स्वतंत्र रूप से निर्णय ले जिसके लिए उन्हें पूरी छूट है। यहाँ तक कि हमें उम्मीद है कि बोर्ड के सदस्यों को स्वयं भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ सकता है।”

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वहीँ सदस्यों के चयन की बात करें तो Facebook के बताया कि उसने चार सह-अध्यक्षों को चुनकर सदस्य चयन प्रक्रिया की शुरुआत की, जिसके बाद उन सभी के साथ मिलकर ही अन्य 16 सदस्यों का चयन किया गया, जिसका ऐलान आज किया गया है।

लेकिन इस बीच इन सभी इन सह-अध्यक्षों का चयन भी बेहद दिलचस्प है। इन सह-अध्यक्षों में संवैधानिक कानून से जुडें दो अमेरिकी प्रोफेसर भी शामिल हैं, जिनमें से एक हैं स्टैनफोर्ड से Michael McConnell और दूसरें हैं Columbia Law कानून से Jamal Greene.

इसके साथ ही डेनमार्क के पूर्व प्रधानमंत्री Helle Thorning-Schmidt भी चार सह-अध्यक्षों में से एक हैं और कोलंबिया के एक प्रमुख लॉ स्कूल के डीन Catalina Botero-Marino चौथे सह-अध्यक्ष हैं।

इस बीच आपको बता दें यह सदस्य चयन की प्रक्रिया तक तक जारी रहेगी जब तक Oversight Board  में कुल प्रस्तावित 40 सदस्य चुन नहीं लिए जाते।

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