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सरकार की नई गाइडलाइनों के चलते Ola, Uber आदि जैसे कैब सेवा प्रदाताओं के राजस्व पर पड़ेगा असर: रिपोर्ट

सरकार की नई गाइडलाइनों के चलते Ola, Uber आदि जैसे कैब सेवा प्रदाताओं के राजस्व पर पड़ेगा असर: रिपोर्ट

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आप जानते ही होंगें की हाल ही में ही केंद्र सरकार ने देश में कैब सेवा प्रदाताओं के लिए नई गाइडलाइन्स जारी की हैं। और अब कई जानकारों के मुताबिक़ इन नई गाइडलाइनों के चलते देश में Ola, Uber आदि जैसे कैब एग्रीगेटर्स का कारोबार धीमा पड़ सकता है।

जी हाँ! दरसल ईटी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, इस इंडस्ट्री से जुड़े कुछ बड़े अधिकारियों आदि ने कहा है कि सरकार द्वारा लाई गई नई गाइडलाइनों के चलते अब कैब एग्रीगेटर्स जैसे Uber और Ola की कमाई पर सीधा असर पड़ सकता है।

आपको बता दें कुछ ही दिन पहले सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा पेश की गई नई गाइडलाइनों में Ola, Uber जैसी सेवाओं पर देश में अधिकतम किराया का 20% तक कमीशन और सर्ज प्राइस को निर्धारित क़ीमतों के 1.5 गुनें तक ही बढ़ा सकने संबंधी प्रतिबंध शामिल है।

दरसल अब तक ये दोनों कैब एग्रीगेटर्स अपने ड्राइवर पार्टनर्स से औसतन 25% तक कमीशन लेते थे, और इतना ही नहीं बल्कि ये सेवा प्रदाता माँग बढ़ने पर सर्ज प्राइस के नाम पर मनमाने तरीक़े से बढ़ी क़ीमतों के साथ सेवाओं की पेशकश करने का काम करते थे।

ईटी की इस रिपोर्ट के मुताबिक़ Superfly Insights द्वारा पेश किए गए  आँकड़े बताते हैं कि COVID-19 के पहले की तुलना में इस वक़्त Uber और Ola अनुमानित रूप से क़रीब 50% से कम संचालन कर पा रहीं हैं और ऐसे में इन नए नियमों के बाद इन कंपनियों के राजस्व में तेज़ी से कमी आ सकती है।

दरसल कई जानकारों का मानना है कि सर्ज प्राइस को लेकर आए नए नियमों से इन कैब एग्रीगेटर्स को बेहद नुक़सान होगा। लेकिन एक सच ये भी है कि ग्राहकों के नज़रिए से ये एक बेहद राहत भरा क़दम है।

इसके अलावा गाइडलाइन में शामिल ड्राइवर ट्रेनिंग, मेडिकल टेस्टिंग और वेरिफ़िकेशन जैसे नए नियमों और प्रॉसेस में की गई थोड़ी वृद्धि के चलते भी अब इन कैब एग्रीगेटर्स के लिए संचालन का ख़र्च बढ़ सकता है, अगर इन्होंने माँग में तेज़ी नहीं दर्ज की, जो फ़िलहाल इतना संभव नज़र नहीं आ रहा।

लेकिन इस बीच सरकार ने कुछ संतुलन भी तलाशने की कोशिश की है। दरसल रिपोर्ट के मुताबिक़ सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर फ़िलहाल के लिए प्राइस और सर्ग प्राइस को लेकर रियायत दी है, जब तक कि कंपनियाँ इसके साथ इक्स्पेरिमेंट कर इनके संचालन का कोई सटीक मॉडल नहीं तलाश लेती हैं।

इस बीच सरकार ने निजी वाहनों और ड्राइवरों के KYC प्रक्रिया के साथ ख़ुद को इन एग्रीगेटर प्लेटफार्म के साथ काम करने की मंज़ूरी दी है। इस बीच सरकार ने इनकी ट्रिप करने की संख्या को भी सीमित किया है। लेकिन ये क़दम ऐसे वक़्त में बेहद कामगार साबित होगा जब कैब की अधिक माँग के चलते लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है।

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इस बीच रिपोर्ट में एक वरिष्ठ सलाहकार के हवाले से यह कहा गया है कि ये कंपनियाँ किराए में मामूली वृद्धि कर सकती हैं, लेकिन कोई बड़ी वृद्धि करने की संभावना नहीं है क्योंकि सरकार ने कहा है कीं भारत अभी भी दाम को लेकर संवेदनशील बाजार है।

दरसल रिपोर्ट में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने अनुसार भारत में ये ऑनलाइन कैब सुविधा अभी भी नए आए सेक्टर में गिनी जाती है और इन कंपनियों के द्वारा कमाए गए कमीशन आदि की रियायत इनके लिए पर्याप्त साबित होगी।

इस बीच आपको बता दें भले ही केंद्र सरकार के मंत्रालय ने ये नई गाइडलाइन जारी कर दी हैं लेकिन हर राज्य ये फैलसा लेने के लिए स्वतंत्र है कि उन्हें ये तुरंत लागू करना है या नहीं?

 

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