संपादक, न्यूज़NORTH
Google drops plan to remove cookies from Chrome: ऐसा लगता है कि टेक दिग्गज Google ने विज्ञापनदाताओं और नियामकों के विरोध के बाद आक्रामक ट्रैकिंग तकनीक को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने के अपने प्रयासों पर ब्रेक लगा दिया है। कंपनी द्वारा कुछ सालों से उपयोगकर्ताओं की प्राइवेसी को पुख्ता करने के लिए कुछ योजनाएं बनाई जा रही थीं, जिसमें Chrome ब्राउज़र से Cookies को हटाना भी शामिल था। लेकिन अब सामने आ रही जानकारी के अनुसार, Google ने इस प्लान को रद्द कर दिया है।
जी हाँ! अपने पूर्व से निर्णय से यू-टर्न लेते हुए अब Google ने अपना मन बदल दिया है। सर्च दिग्गज ने सोमवार को अप्रत्याशित रूप से इसकी घोषणा की और बताया कि वह प्राइवेसी को पुख्ता करने के लिए एक नया रास्ता अपनाने जा रहा है। इसके तहत कंपनी Chrome पर यूजर्स को ही Cookies को चालू या बंद करने का विकल्प प्रदान करेगी। पर Cookies को स्थाई तौर पर ब्राउज़र से पूरी तरह हटाया नहीं जाएगा।
Google drops plan to remove cookies from Chrome
आपको याद दिला दें, साल 2020 में ही कंपनी की ओर से सभी क्रॉस-वेबसाइट Cookies को खत्म करने की दिशा में प्रयास शुरू किया गया था। असल में इसके पीछे यूजर्स की प्राइवेसी को मज़बूत करने जैसे तर्कों का हवाला दिया गया था। इसके लिए गूगल ने अपनी “प्राइवेसी सैंडबॉक्स” पहल शुरू की थी ताकि एक ऐसा समाधान खोजा जा सके जो उपयोगकर्ता की प्राइवेसी की रक्षा करे और ओपन वेब पर कंटेंट को मुफ्त में उपलब्ध रखे।
न्यूज़North अब WhatsApp पर, सबसे तेज अपडेट्स पानें के लिए अभी जुड़ें!
लेकिन जून 2021 में Google ने Cookies को हटाने की समय सीमा को बढ़ा दिया, जिससे डिजिटल विज्ञापन इंडस्ट्री को थोड़ा और अधिक समय दिया जा सके। इतना ही नहीं बल्कि साल 2022 में कंपनी ने कहा था कि फीडबैक से पता चला कि विज्ञापनदाताओं को Google के Cookies हटाने के फैसले को लागू करने से पहले थोड़े और समय की आवश्यकता है, क्योंकि उनका मानना है कि यह कदम उनके व्यवसायों को व्यापक तौर पर प्रभावित करेगा।
लेकिन सोमवार को एक ब्लॉग पोस्ट में, कंपनी ने कहा कि उसे विज्ञापनदाताओं और नियामकों दोनों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर Chrome ब्राउज़र में थर्ड-पार्टी Cookies को खत्म करने की योजना को रद्द किया जा रहा है। कंपनी के मुताबिक, टेस्टिंग के बाद उसको यह एहसास हुआ है कि यह कदम यह प्रकाशकों, विज्ञापनदाताओं और ऑनलाइन विज्ञापन में शामिल लगभग सभी हितकरों को बड़े पैमानें पर प्रभावित करेगा।
कंपनी की ओर से कहा गया कि थर्ड-पार्टी Cookies को हटाने के बजाए Chrome यूजर्स को एक विकल्प पेश किया जा सका है, ताकि वह सूचित विकल्पों के तहत किसी भी समय उस आवश्यकता अनुसार विकल्प को चुन सकें। लेकिन इतना साफ़ किया गाय है कि नए कदमों को लागू करने से पहले भी नियामकों और इंडस्ट्री के साथ चर्चा की जाएगी।
फिलहाल संभावित आगामी निर्णय काफी कुछ Apple के ब्राउज़र Safari की उस नीति के समान है, जिसे ब्राउज़र पर डिफ़ॉल्ट रूप से थर्ड-पार्टी ट्रैकिंग को रोकने के लिए अपनाया जाता है। जाहिर है Google ने भी इसी तरह की नीति को अपना लिया है।
असल में Cookies उपयोगकर्ताओं के ऑनलाइन व्यवहार को ट्रैक करने के लिए उनके ब्राउज़र में डाली गई छोटी टेक्स्ट फ़ाइलें, ऑनलाइन विज्ञापनदाताओं द्वारा कई वेबसाइटों पर उपयोगकर्ताओं की निगरानी करने और उन्हें उनकी रुचियों के आधार पर विज्ञापन दिखाने आदि के लिए इस्तेमाल होने वाला अहम टूल है। देखा जाए तो Cookies की शुरुआत से ही यह तरीका विवादास्पद रहा था।