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ChatGPT डाटा सेंटर्स में हो रही ‘भारी मात्रा में पानी की खपत’, जारी की गई चेतावनी

ChatGPT डाटा सेंटर्स में हो रही ‘भारी मात्रा में पानी की खपत’, जारी की गई चेतावनी

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ChatGPT data centres are consuming a staggering amount of water: एक तरफ दुनिया भर में माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) समर्थित OpenAI द्वारा बनाया गया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या एआई चैटबॉट चैटजीपीटी (ChatGPT) रोजाना इस्तेमाल के नए-नए स्वरूपों के चलते सुर्खियाँ बटोरता रहता है, वहीं दूसरी ओर इसको लेकर तमाम लोग तरह-तरह की चिंताएं व्यक्त करते भी नजर आते रहे हैं।

जाहिर है, आज तक शायद आपने शायद ChatGPT से संबंधित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तकनीकी पहलुओं से जुड़ी चिंताओं कि जिक्र ही सुना होगा। लेकिन अब ChatGPT की वजह से पर्यावरण को सीधे तौर पर हो रहे नुकसान की बात भी सामने आई है।

जी हाँ! हाल में किए गए एक नए अध्ययन में यह सामने आया है कि ChatGPT के डेटा सेंटरों में भारी मात्रा में पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, ChatGPT लोगों के सवालों का जवाब देने, तार्किक प्रश्नों को हल करने आदि जैसी जिन क्षमता को प्रदर्शन करता है, उसके लिए वह भारी मात्रा में पानी की खपत करता है।

असल में ‘यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास आर्लिंगटन’ तथा ‘यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो रिवरसाइड’ के शोधकर्ताओं की ओर से जारी किए गए “मेकिंग एआई लेस थर्स्टी” (Making AI Less Thirsty) शीर्षक वाले प्री-प्रिंट पेपर में यह अनुमान सामने आया है। इसमें एआई तकनीकों द्वारा पानी के इस्तेमाल का ज़िक्र किया गया है।

chatgpt water

ChatGPT कैसे करता है पानी का इस्तेमाल? 

हम सब जानते हैं कि इंटरनेट पर मौजूद तमाम सेवाओं के लिए कंपनियाँ डेटा सेंटर्स का इस्तेमाल करती हैं। और ChatGPT जैसी तकनीकी सेवा के लिए तो व्यापक डेटा सेंटर्स की आवश्यकता होती है।

अन्य तमाम कंपनियों की तरह, यह एआई मॉडल भी स्वच्छ मीठे पानी का इस्तेमाल, डेटा सेंटर के सर्वरों को बिजली देने और कूलिंग आदि के लिए करता है।

जब यह देखा गया कि OpenAI और Google जैसी कंपनियों द्वारा डेटा प्रोसेसिंग सेंटर्स को ठंडा करने के लिए कितने पानी की जरूरत होती है, तो शोधकर्ताओं ने पाया कि केवल GPT-3 की ट्रेनिंग में ही OpenAI के भागीदार Microsoft ने 185,000 गैलन पानी का इस्तेमाल किया।

ChatGPT Consumes Huge Amount of Water? 

दिलचस्प रूप से एक अनुमान के अनुसार, यह उतना ही पानी है, जितना एक परमाणु रिएक्टर को ठंडा रखने के लिए आवश्यक होता है। उदाहरण के तौर पर वैज्ञानिकों ने कहा कि सिर्फ GPT-3 की ट्रेनिंग में Microsoft ने 7 लाख लीटर पानी खर्च किया होगा, जितने में लगभग 370 BMW कारें बनाई जा सकती हैं।

शोध में यह भी अनुमान जताया गया कि ChatGPT नामक यह एआई चैटबॉट लगभग 20-50 प्रश्नों का जवाब देने के लिए ही लगभग आधा लीटर पानी का इस्तेमाल कर लेता है।

ऐसे में विश्व स्तर पर ChatGPT के करोड़ों यूजर्स को देखते हुए, इसके द्वारा इस्तेमाल होने वाली पानी की मात्रा का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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इस बीच शोधकर्ताओं ने कहा है कि टेक दिग्गज गूगल (Google) भी LaMDA व अन्य एआई मॉडल के लिए लाखों लीटर पानी का इस्तेमाल कर सकती है।

इतना ही नहीं बल्कि यह भी संभावना जताई जा रही है कि नए लॉन्च किए गए GPT-4 एआई चैटबॉट सिस्टम के मामले में पानी की खपत और कई गुना बढ़ सकती है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि यह तुलनात्मक रूप से बड़ा मॉडल बताया जा रहा है।

वैसे साफ कर दें कि GPT-4 के लिए पानी की खपत का अनुमान लगाने के लिए फिलहाल कोई सार्वजनिक डेटा उपलब्ध ना होने की बात भी सामने आई है।

इन सब चीजों को देखते हुए, शोधकर्ताओं ने इन तमाम टेक कंपनियों से यह अपील की है कि ‘पानी की खपत’ को लेकर पारदर्शिता को बढ़ाया जाए और इस्तेमाल की मात्रा को कम करने की दिशा में भी कदम उठाए जाने की जरूरत है।

इस बात में कोई शक नहीं है कि वैश्विक स्तर पर पानी की कमी की चुनौती से निपटने की दिशा में कई प्रयास किए जा रहे हैं, और ऐसे में इन टेक कंपनियों को भी इस बात की गंभीरता को समझने का प्रयास करना चाहिए।

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