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स्थानीय भाषा आधारित माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म Koo ने हासिल किया क़रीब ₹30 करोड़ का निवेश

स्थानीय भाषा आधारित माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म Koo ने हासिल किया क़रीब ₹30 करोड़ का निवेश

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स्थानीय भाषाओं पर आधारित देसी माइक्रोब्लॉगिंग ऐप, Koo ने अब अपने सीरीज़-ए राउंड में मौजूदा निवेशकों Accel Partners, Kalaari Capital, Blume Ventures और Dream Incubator के साथ ही नए निवेशक 3one4 Capital से क़रीब $4.1 मिलियन (लगभग ₹30 करोड़) हासिल किए हैं।

बीते साल 2020 में ही स्थापित हुआ और लोकप्रिय माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म Twitter का एक भारतीय विकल्प के रूप में उभरा Koo फ़िलहाल उपयोगकर्ताओं को 13 स्थानीय भाषाओं जैसे हिंदी, कन्नड़, तेलुगु, बंगाली आदि में कनेक्ट, कॉमेंट और एंगेज होने की सहूलियत प्रदान करता है।

कंपनी की माने तो इसका ये प्लेटफ़ॉर्म अंग्रेजी भाषा से परे अन्य स्थानीय भाषाओं में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को सुविधाओं से लैस करना चाहता है।

Koo: स्थानीय भाषाओं पर केंद्रित प्लेटफ़ॉर्म

हम जानते हैं कि Google व तमाम इंटरनेट दिग्गज़ कंपनी इस बात पे मोहर लगा चुकी हैं कि आने वाले समय में लाखों-करोड़ों ऐसे नए उपयोगकर्ता इंटरनेट से जुड़ते नज़र आएँगें जो स्थानीय भाषाओं में सुविधाओं के इस्तेमाल को प्राथमिकता दे सकते हैं।

इस बीच इस नए निवेश दौर को लेकर Koo के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, Aprameya Radhakrishna ने कहा;

“मौजूदा माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म अंग्रेजी बोलने वाली आबादी के अलावा अन्य लोगों तक उतनी पहुँच नहीं बना सके हैं। और वही Koo स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता देने के साथ ही साथ प्रत्येक भारतीय को अपने विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति की सहूलियत देता है। Koo एक ऐसा भारतीय प्लेटफ़ॉर्म है जो भारत की दैनिक आवाज़ों को उठाने का काम कर रहा है।”

इस बीच कंपनी की मानें तो इस नए निवेश का इस्तेमाल कंपनी अब मार्केटिंग के साथ ही साथ अपनी तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए भी करती नज़र आएगी।

वहीं कंपनी में एक नए निवेशक के तौर पर शामिल हुए 3one4 कैपिटल के प्रमुख, अनुराग रामदासन ने कहा;

“भारत के लिहाज़ से Koo एक बेहद अहम और शक्तिशाली प्लेटफ़ॉर्म है। भारत में सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को भाषाओं व अन्य कई लिहाज़ से दर्शकों के लिए अत्यधिक प्रासंगिक बनाने की ज़रूरत है जैसे और अधिक स्थानीय कम्यूनिटी को बढ़ावा देना, कंटेंट मॉडरेशन और अधिक प्रासंगिक कटेंट को जगह देना आदि।”

आपको बता दें माइक्रोब्लॉगिंग स्टार्टअप Koo भारत सरकार द्वारा आयोजित आत्मनिर्भर ऐप चैलेंज (Aatmanirbhar App Challenge) का विजेता भी रह चुका है और इसे 2020 में Google PlayStore के सर्वश्रेष्ठ दैनिक ऐप (Best Daily Essential App) के ख़िताब से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी इस प्लेटफ़ॉर्म को “मन की बात” कार्यक्रम में विशेष संबोधन मिल चुका है।

दरसल एक ऐसा समय जब भारत में तेज़ी से स्वदेशी और आत्मनिर्भर चीज़ों को बढ़ावा देने की लहर चल रही है और अन्य विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म जैसे Facebook व Twitter आदि देश में कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, ऐसे में ऐसे मज़बूत देसी सोशल मीडिया विकल्प आने वाले समय में काफ़ी लोकप्रिय हो सकते हैं।

आपको बता दें कुछ ही दिनों पहले सरकार से Twitter को फटकार लगाते हुए कहा है कि वह सरकार के आदेशों को मानने के लिए बाध्य है, वरना कंपनी को इसकी सजा भी भुगतनी पड़ सकती है।

ये मामला असल में क़िसान आंदोलन से जुड़ा हुआ है, जिसको लेकर कुछ दिन पहले सरकार ने Twitter से कुछ अकाउंट और Tweets को बंद करने व हटाने के निर्देश दिए थे, जिसको Twitter ने माना भी, लेकिन भारी विरोध के बाद Twitter ने कुछ अकाउंट व Tweets को वापस से बहाल कर दिया और इसके बाद सरकार ने वापस से कंपनी को चेतावनी भेजी है।

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