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पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल: सरकार ने लगभग तैयार कर लिया नया बिल, अगले सत्र में हो सकता है पेश: रिपोर्ट

पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल: सरकार ने लगभग तैयार कर लिया नया बिल, अगले सत्र में हो सकता है पेश: रिपोर्ट

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New Personal Data Protection Bill is Ready?:  भारत की केंद्र सरकार ने पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल 2019 को वापस ले लिया है। असल में संसद की संयुक्त समिति ने इस बिल में लगभग 81 ‘संशोधन’ या कहें तो ‘बदलाव’ प्रस्तावित किए थे। ऐसे में सरकार ने इतने सारे बदलाव करने के बजाए इसको वापस लेना ही बेहतर समझा।

लेकिन इसकी वापसी के कुछ ही घंटों बाद अब यह संकेत मिलने लगें हैं कि सरकार ने इसकी जगह पेश किया जाने वाला नया बिल करीब-करीब तैयार कर लिया है।

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जी हाँ! ET की हालिया रिपोर्ट में यह बताया गया है कि केंद्रीय मंत्री अश्वनि वैष्णव ने बातचीत में बताया कि नया डेटा प्रोटेक्शन बिल लगभग तैयार कर लिया गया है और इसने बहुत जल्द सार्वजनिक परामर्श के लिए पेश किया जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री अश्वनि वैष्णव ने कहा कि सभी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए, इस बिल को जल्द ही सरकार की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा और फिर इसे अगले या आगामी सत्र में संसद पटल पर एक नए विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा।

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इसके साथ केंद्रीय मंत्री ने ये भी स्पष्ट किया कि जब संसद की संयुक्त समिति ने PDP बिल की विस्तृत समीक्षा की, तो उन्होंने 99 धाराओं में 81 संशोधनों की सिफारिश की और 12 सुझाव दिए थे। ऐसे में सरकार ने पुराने बिल को वापस लेते हुए, नए बिल को पेश करना ही उचित समझा।

New Personal Data Protection Bill: क्या हो सकता है खास?

माना ये जा रहा है कि पुराने पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल की तरह ही इसने नए बिल में भी प्राइवेसी संबंधित मूल सिद्धांतों और अधिकारों को जगह दी जाएगी।

आप सोच रहें होंगें कि फिर इस नए बिल में क्या बदलाव हो सकतें हैं। जानकारों की मानें तो नए बिल में मुख्य तौर पर देश में बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की मूलभूत आवश्यकताओं पर विचार किया जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री ने ET को आगे बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह होना चाहिए। वे सभी चीजें आज की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए मूलभूत आवश्यकताएं हैं और नए मसौदे को तैयार करते समय इनका ध्यान रखा जाएगा।

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पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल 2019 पर उठ रहे थे कुछ गंभीर सवाल!

ग़ौर करने वाली बात ये है कि पुराने बिल को लेकर कुछ जानकार लगातार आपत्ति जता रहे थे। कई लोगों का कहना यह भी था कि वह बिल डेटा प्राइवेसी संबंधित नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता नजर आता है।

साथ ही पर्सनल डेटा को इक्कठा करने के तरीकों को लेकर भी सवाल उठते नजर आए थे। विपक्षी राजनीतिक दल बार-बार इस बात को उठा रहे थे कि पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल 2019 से सरकार के लिए किसी भी नागरिक की जासूसी करना आसान हो जाएगा। इन आरोपों को जाहिर तौर पर सरकार लगातार नकारती रही है।

साथ ही उस वक्त इंटरनेट व मोबाइल कंपनियों से संबंधित निकाय IAMAI ने भी ‘पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल’ में कुछ प्रावधानों को लेकर चिंता जताई थी।

यह बातें समनें आने लगी थीं कि इस बिल के साथ “नॉन-पर्सनल डेटा” तक भी सरकार की पहुँच आसान हो जाएगी।

वैसे आपको बता दें पुराने बिल में “संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा” शब्द का इस्तेमाल किया गया था, जिसमें वित्तीय और बायोमेट्रिक डेटा शामिल किया गया था। तब निहित प्रावधानों के मुताबिक, ऐसे डेटा को सिर्फ स्थानीय तौर पर ही संग्रहीत किया जाना चाहिए।

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