Now Reading
सरकार ने नियमों का हवाला देते हुए, Flipkart का ‘फ़ूड रिटेल बिज़नेस’ के लिए दिया आवेदन किया ख़ारिच

सरकार ने नियमों का हवाला देते हुए, Flipkart का ‘फ़ूड रिटेल बिज़नेस’ के लिए दिया आवेदन किया ख़ारिच

flipkart-and-phonepe-complete-separation

Walmart के मालिकाना हक़ वाली Flipkart के लिय शायद समय थोड़ा और ख़राब हो गया है, COVID-19 की मार झेल रहें व्यापार के बाद अब भारत सरकार के उद्योग और आंतरिक व्यापार को बढ़ावा देने वाले विभाग ने फ़ूड रिटेल व्यापार लाइसेंस के लिए कंपनी के आवेदन को खारिज कर दिया है।

आपको बता दें यह विभाग असल में वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत आता है, और इसने उसी मंत्रालय के नियामक मुद्दों का हवाला देते हुए यह क़दम उठाया है। लेकिन इस बीच Flipkart का कहना है कि वह जल्द ही लाइसेंस के लिए फिर से आवेदन करेगा।

आपको बता दें Flipkart के द्वारा FarmerMart के माध्यम से एक जाने पहले ही यह आवेदन किया गया था, और अब पिछले हफ़्ते इस आवेदन को खारिज कर दिया गया है। DPIIT ने कहा कि Flipkart को फ़ूड रिटेल क्षेत्र में अनुमति नहीं दी जा सकती है, क्योंकि इसको प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए एक अलग श्रेणी के रूप में रखा गया है। एक ऐसी कम्पनी को किसी भी मार्केटप्लेस का संचालन करती हो, या फिर उसमें हिस्सेदारी रखती हो, उसको उसके ही मंच पर उत्पाद बेचने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

आपको बता दें भारत के ज्यादातर घरेलू फ़ूड रिटेल को बढ़ावा देने के लिए Flipkart ने फ़ूड रिटेल व्यापार में 100% FDI के लिए अनुमति मिलने के बाद ही इस लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। इसका उद्देश्य विदेशी ब्रांडों को भारत में निर्मित उत्पादों में निवेश करने की अनुमति देना था और ताकि बदले में किसानों को अधिक स्थिर आय स्रोत प्रदान किया जा सके।

Flipkart के लिए यह इसलिए भी एक बड़ा झटका है, क्योंकि देश में इसके सबसे बड़े प्रतिद्वंदी, Amazon को 3 साल पहले ही इसकी अनुमति मिल गयी थी, और तब से Amazon भारत के फ़ूड रिटेल क्षेत्र में अपनी शुरुआत कर चुका है।

साथ ही साथ Grofers के पास भी ऐसा ही लाइसेंस है, और वह सफलतापूर्वक व्यापार का विस्तार करने में सक्षम था, विशेष रूप से कोरोनोवायरस प्रेरित लॉकडाउन के दौरान। लेकिन ख़बर यह है कि कम्पनी अब फ़िलहाल Paytm Mall के साथ मर्ज़ होने के प्रयासों में है, ताकि इसको सप्लाई चेन में और अधिक विस्तार करने के लिए पैसा मिल सके।

See Also
ex-twitter-ceo-parag-agrawal-raises-30-mn-dollar-for-new-ai-venture

आपको बता दें देश में ई-कॉमर्स कंपनियों के संचालन पर लगाम रखने के लिए DPIIT द्वारा ऐसे उपाय उठाए गये हैं। दरसल अधिकांश ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म एक बाज़ार मॉडल पर काम करते हैं, जिसमें वे अपने प्लेटफ़ॉर्म पर उपयोगकर्ताओं के लिए थर्ड पार्टी विक्रेताओं के उत्पादों को लिस्ट करते हैं।

और इसलिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ये ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ख़ुद अपने प्रोडक्ट को बढ़ावा देने के लिए ग़लत ढंग से प्लेटफ़ोर्म का इस्तेमाल न कर सकें।

©प्रतिलिप्यधिकार (Copyright) 2014-2023 Blue Box Media Private Limited (India). सर्वाधिकार सुरक्षित.