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CAIT ने सरकार को पत्र लिखकर की “ऑनलाइन दवा बिक्री” पर ‘रोक’ लगाने की मांग

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भारत में क़रीब 8 करोड़ ट्रेडर्स/ व्यापारियों और 40,000 ट्रेड एसोसिएशंस का प्रतिनिधित्व करने वाले कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने अब एक बड़ा क़दम उठाते हुए ई-कॉमर्स चैनलों के माध्यम से दवाओं (Online Medicine) की बिक्री पर रोक लागने की माँग की है।

जी हाँ! असल में कैट ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्ष वर्धन को भेजे गए एक पत्र में कहा है कि ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए ई-कॉमर्स कंपनियाँ गैर-कानूनी तरीके से दवाओं को बेचकर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का सीधा उल्लंघन रही हैं।

इस ट्रेडर्स यूनियन के मुताबिक़ दवाओं के अवैध तरीक़े से ऑनलाइन बेचें जाने के चलते मेडिसिन रिटेलर्स, कॉस्मेटिक्स सेक्टर से जुड़े लाखों लोगों के व्यापार पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है, जो क़ानूनी तरीक़े से सभी नियमों का पालन करते हुए ग्राहकों व जरूरतमंद लोगों को दवाएं मुहैया करा रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने पीयूष गोयल को भेजे गए पत्र में कहा है कि Temasek के धर्मेस सेठ एंड इन्वेस्टमेंट, प्रशांत टंडन की 1mg, Reliance के मालिकाना हक़ वाली Netmeds और Walmart के मालिकाना हक़ वाली Flipkart से लेकर Amazon तक की ऑनलाइन फार्मेसी के ज़रिए बाज़ार को बिगाड़ने का काम किया जा रहा है।

असल में CAIT का कहना है कि इन बड़ी कंपनियों के चलते इस क्षेत्र में रिटेल और डिस्ट्रीब्यूटर्स को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ये कंपनियाँ मनचाहे दामों, कैपिटल डंपिंग, और भारी ऑफ़र्स के ज़रिए रिटेल बाजार को भुखमरी की राह पर ला रही हैं।

प्रवीण के अनुसार रिटेल और डिस्ट्रीब्यूटर्स सहित दवा रिसेलर्स असल में देशभर के जरूरतमंद मरीजों के लिए एक आसान संपर्क बिंदु के तौर पर मौजूद हैं। लेकिन, इन ई-फार्मेसी कंपनियों के को मिलने वाली विदेशी फ़ंडिंग के चलते ये दामों को कम से कम करके दवाएँ बेचते हैं, जिसका मुक़ाबला कोई छोटे व्यापारी या दुकान नहीं कर सकते।

इसलिए ये कंपनियाँ जो ख़ुद दवाओं के मार्जिन के बजाए, फ़ंडिंग को मुख्य पैसों का सोर्स बनाती हैं, वह कम दामों के कारण ऑफ़लाइन रिटेलर्स को ख़ासा नुक़सान पहुँचा रही हैं।

लॉकडाउन के बाद ऑफ़र्स से चला Online Medicine का बाज़ार: CAIT

CAIT के महामंत्री ने कहा कि लॉकडाउन के बाद अक्टूबर, 2020 में दुकानों के खुलने के बाद ई-फार्मा कंपनियां जैसे कि Medlife और PharmEasy आदि ने ऑनलाइन 30% तक के भारी डिस्काउंट दिए। इसके साथ ही इन कंपनियों ने बाजार पर पूरी तरह कब्ज़ा करने के लिए 20% तक कैश बैक और फ्री डिलीवरी की सुविधा भी दी, मतलब देखा जाए तो क़रीब 40-45% डिस्काउंट और फ्री डिलीवरी जैसी लुभावनी स्कीमें ग्राहकों को देकर उनकों ऑनलाइन दवाएँ लेने पर मजबूर किया गया।

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क्या Online Medicines की नहीं हो सकती होम डिलीवरी?

रिपोर्ट की मानें तो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट-1940 के तहत पर्चे वाली दवाओं की होम डिलीवरी की अनुमति नहीं दी जा सकती है। और साथ ही हिना फ़ंडिंग आदि के 30-40% तक का डिस्काउंट दे पाना भी नामुमकिन है, इसके ज़रिए रिटेल फार्मेसी बाज़ार को नुक़सान पहुँचाया जा रहा है।

छोटे व्यापारियों के लिए Bharat E Market प्लेटफ़ॉर्म ला रहा है CAIT

कुछ ही हफ़्ते पहले CAIT ने अपने ई-कॉमर्स पोर्टल Bharat E Market का एक मोबाइल ऐप लॉन्च किया है ।

CAIT ने मई 2020 में अपने ई-कॉमर्स पोर्टल Bharat E Market का ऐलान किया था। इस प्लेटफ़ॉर्म पर एक जियोटैगिंग सुविधा भी दी जाएगी ताकि ग्राहकों को उनकी पसंद के निकटतम स्टोर से ऑर्डर करने की सहूलियत मिल सके। एक बार ऑर्डर देने पर व्यापारियों को समान डिलीवर करने में सिर्फ़ दो घंटे तक का समय लगेगा।

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