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इसरो की मदद से Skyroot कर रहा है भारत का पहला ‘प्राइवेट स्पेस रॉकेट’ लॉन्च करने की तैयारी

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पिछले कुछ समय से भारत के स्पेस जगत में अपनी मज़बूत पहचान बनाती नज़र आ रही हैदराबाद आधारित Skyroot Aerospace के मिशन को अब देश के प्रतिष्ठित अंतरिक्ष संस्थान, इसरो (ISRO) की भी मदद मिलने की ख़बर सामने आई है।

असल में Skyroot Aerospace ने भारत में पहली बार प्राइवेट तौर पर डिजाइन और विकसित किए गए स्पेस रॉकेट विक्रम -1 (Vikram-1) को लॉन्च करने के लिए अब अंतरिक्ष विभाग के साथ एक समझौता किया है।

ISRO Skyroot आए साथ

ख़बर ये है कि दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षर किए जा चुके इस समझौते के तहत विभाग इस कंपनी को इसरो (ISRO) के केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं और तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग करने की इजाज़त देगा। ख़बरों के मुताबिक़ इस लॉन्च प्रोग्राम को सफ़ल बनाने के लिए इसरो (ISRO) के वैज्ञानिकों की भी मदद ली जा सकती है।

असल में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिक सचिव आर उमामहेश्वरन ने अंतरिक्ष विभाग की ओर से इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। वहीं Skyroot Aerospace के सीईओ पवन कुमार चंदाना ने कंपनी की तरफ से समझौते पर हस्ताक्षर किए।

Skyroot के प्रतिनिधियों ने इसरो प्रमुख डॉ. के. सिवन से भी मुलाकात की, जिन्होंने कंपनी को अपने लॉन्च वाहन के परीक्षण और सुधारों आदि को लेकर हर तरह की मदद करने का आश्वासन दिया।

असल में IANS की रिपोर्ट के अनुसार चंदाना ने यह साफ़ शब्दों में कहा कि ये समझौता इसरो के साथ उनके काम की औपचारिक शुरुआत का प्रमाण है। उन्होंने कहा;

“इस समझौते के तहत, हम आपस में डेटा और तकनीकी विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करेंगे। इसरो (ISRO) के साथ आने से हमारे प्रोग्राम को और अधिक तेज़ी व मज़बूती मिलेगी क्योंकि अब हमारे साथ इसरो की ताकत होगी और हमें तमाम विशेषज्ञता और तकनीकों का उपयोग करते हुए टेस्टिंग और लॉन्चिंग को सफ़ल बनाने का मौक़ा मिलेगा।”

इस बीच इसरो (ISRO) के एक पूर्व वैज्ञानिक रहे चंदना ने ये भी बताया कि राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी के पास एक समिति है जो परीक्षण सुविधाओं के उपयोग के लिए सभी तरह की मंज़ूरी प्रदान करती है।

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असल में पवन कुमार चंदाना ने इसरो के पूर्व वैज्ञानिकों नागा भरत डाका और वासुदेवन ज्ञानगंधी के साथ मिल्कर  Skyroot की स्थापना की थी, और कंपनी का लक्ष्य साल 2021 के अंत तक अपना पहला रॉकेट लॉन्च करने का है।

कंपनी के अनुसार भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखने वाले विक्रम साराभाई से प्रेरणा लेकर इसने अपने लॉंच वाहनों की एक सीरीज़ “Vikram Series” विकसित करने की योजना बनाई है। इन वाहनों को विशेष रूप से छोटे उपग्रहों की जरूरतों के लिए बनाया जा रहा है, जो पेलोड की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करेगा। Skyroot का खाना है कि Vikram वाहन “अंतरिक्ष क्षेत्र में सबसे सस्ती और ऑन डिमांड सवारी” की पेशकश करेंगें।

असल में कंपनी का मक़सद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छोटे सैटेलाइट लॉन्च बाजार में व्यापाक तौर पर उतरने का है, जो बाज़ार अगले एक दशक में कुछ अनुमानों के मुताबिक़ क़रीब $16 बिलियन तक का हो सकता है।

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