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NPCI ने कहा WhatsApp करने लगा है डेटा-स्थानीयकरण नियमों का पूरी तरह से पालन: रिपोर्ट

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आज एक बड़ी ख़बर सामने आई, दरसल भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा सुप्रीम कोर्ट के साथ एक फाइलिंग में अब यह सामने आया है कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) ने RBI को बताया है कि Facebook के स्वामित्व वाला मैसेजिंग एप्लिकेशन WhatsApp अब भारत के डेटा-स्थानीयकरण नियमों का पूरी तरह से पालन कर रहा है।

यह ख़बर ईटी के हवाले से यह सामने आया है कि 5 जून को लिखे पत्र में UPI का प्रबंधन करने वाली NPC ने RBI को बताय कि यह पुष्टि करता है कि WhatsApp अब भुगतान सेवा के लिए डेटा-स्थानीयकरण सभी शर्तों को पूरा करने लगा है।

अगर रिपोर्ट को सही मानें तो दिलचस्प यह है कि ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जब इन पेमेंट नियामकों ने औपचारिक रूप से WhatsApp Pay को योग्य बताया है।

इस पत्र के अनुसार NPCI ने RBI को लिखा कि;

“NPCI ने Post-Change Review Report III की समीक्षा की है जो WhatsApp को लेकर एक स्वतंत्र तृतीय-पक्ष CERT-In द्वारा सूचीबद्ध ऑडिटर, Deloitte द्वारा प्रमाणित है। और इसलिए अब हमनें अपने कार्यालय द्वारा जारी किए गए डेटा स्टोरेज को लेकर दिशानिर्देशों पर शेष तीन बिंदुओं में WhatsApp को सभी ज़रूरी निर्देशों का पालन करते हुए पाया है। Deloitte द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में WhatsApp को अब 1 नवंबर, 2019 को RBI द्वारा जारी सभी पांच बिंदुओं का अनुपालन करते पाया गया है।”

लेकिन दिलचस्प यह है कि RBI ने अभी भी WhatsApp को इस संबंध में कोई अधिकारिक मंज़ूरी नहीं दी है। फ़िलहाल WhatsApp सिर्फ़ अपनी पेमेंट सुविधा को देश में टेस्टिंग स्टेज में ही चला रहा है और यह दो साल से  1 मिलियन उपयोगकर्ताओं तक ही सीमित रहने के लिए प्रतिबंधित है।

ज़ाहिर है देश में 400 मिलियन मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता आधार रखने वाला WhatsApp जल्द से जल्द अपनी पेमेंट सेवा को देश में लॉंच करना चाहता है और अब तक भारत के नए डेटा-स्थानीयकरण नियम के चलते ही RBI ने इस पर रोक लगा रखी है और यहाँ तक कि मामला सप्रीम कोर्ट में भी है।

दरसल अपनी योजना के दौरान वैश्विक स्तर पर 2 बिलियन उपयोगकर्ता आधार वाले WhatsApp को कई बार अफवाहों से लेकर अभद्र भाषा वाले संदेशों के वायरल करने और कमजोर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसे आरोपों का भी सामना करते रहना पड़ा है।

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ख़ास यह है कि पिछले हफ्ते ही WhatsApp India के प्रमुख अभिजीत बोस ने कहा कि यह अपने उपयोगकर्ताओं में से कम से कम 200 मिलियन को UPI सेवाओं को पेशकश कर सकतें हैं, क्योंकि मौजूदा वक़्त में बनी महामारी की स्थिति के चलते डिजिटल पेमेंट में काफ़ी वृद्धि हुई है।

लेकिन WhatsApp के लिए राह इतनी भी आसान नहीं होने वाली, क्योंकि देश के UPI क्षेत्र में Google Pay, Walmart समर्थित PhonePe, Alibaba और SoftBank समर्थित Paytm के साथ-साथ Amazon Pay पहले ही अपनी अपनी ज़मीन तैयार कर चुकें हैं।

इन सब के बीच जून में WhatsApp ने अपनी पेमेंट सुविधा को ब्राजील में लॉंच भी किया था, लेकिन लॉन्च के एक हफ़्ते बाद ही WhastApp Pay सुविधा को बैन कर दिया गया। लेकिन इसके बाद भी WhatsApp ने साफ़ शब्दों में यह कहा था कि यह भारत को लेकर काफ़ी प्रतिबद्ध है और इसने स्थानीय बैंकों और नियामकों के साथ काम करना भी शुरू कर दिया है।

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